सिन्धी भाषा
सिन्धी भाषियों के लिए एक खबर है। अच्छी है की ख़राब खुद ही जाने और निर्णय ले. साहित्य अकदमी के पुरस्कारों की घोषणा हुई है. इस बार सिन्धी भाषा के लिए किसी को ये पुरस्कार नहीं मिला है.
ऐसा तो होना ही था। हम सिन्धी लोग सिन्धी बोलना ही नहीं चाहते हैं , पढेंगे क्या खाक. हम सिन्धी बोलना और पढ़ना अपनी हेटी समझते है. बचे को घर में हीनी सिखिय जाती है की स्कूल जायेगा तो क्या बोलेगा.
ऐसा सिर्फ हम सिन्धी परवारों में ही होता है. बंगाली, गुजराती या फिर पंजाबी परिवार अपने बच्चों को सिर्फ अपनी भाषा सबसे पहले सिखाते है.
हम सिन्धी लोग ऐसी हर चीज़ में पिचादना चाहते है. आज बहुत सारे सिन्धी साहित्य अकादमी के पधादिकारी या अन्य सिन्धी भासः से जुडी संस्थाओं के पदाधिकारी स्वयम अपने बच्चों से या फिर बच्चों के बच्चों से एनी भाषा में बात करते हैं पर सिन्धी में नहीं करते है. पहले तो हमारे परिवारों में मंगलवार और शनिवार को सिन्धी के रेडियो कार्यक्रम बड़े छाव से सुने जाते थे लेकिन आज कयिओं को पता भी नहीं होगा कि ऐसा कोई कार्यक्रम आता भी है.
जैसे हम अपने अगली पीढ़ी को आगे बड़ा रहें हैं बिन अपनी सिन्धी भाषा के बहुत जल्द सिन्धी भाषा समाप्त हो जाएगी। हम भारत में रहने वाले सिन्धी ही सिर्फ अपनी भाषा के प्रयोग में सह्र्माते हिं या हिचकिचाते हैं जबकि भारत से बहार रहें वाले सभी सिन्धी चाहे सिंगापूर में हो या दुबई में या फिर इंडोनेशिया, फिलिपींस या अमरीका में वे लोग सिन्धी का प्रयोग करते हैं और बड़ी खूबी से करते है. हम भारतीय सिंधियों को भी अपनी इस कमी पर विचार करना चाहिए और अपनी भाषा के प्रयोग को बढावा देना चाहिए
सिन्धी अबाणी बोली मिठडी अबाणी बोली
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