कसाब - फांसी के बाद
फांसी के बाद कसाब की आत्मा या रूह जो भी कहें जहाँ भी होगी सोचती होगी की किस मुहूर्त में भारत में आया और ऐसी आतंकवादी गतिविधि में भाग लिया . जिसने भी मुझे भेजा वो तो आराम से दुबई या पाकिस्तान में बैठा मज़े ले रहा होगा और मुझे फांसी दे दी गयी।
26 11 को जब वी टी स्टेशन पर लोगो को मारा था या फिर ताज में मज़े लिए थे तब नहीं सोचा था की इन भारतीय लोगों के हाथे चढ़ जाऊँगा। खैर सालों ने जितने दिन मुंबई जेल में रखा बड़े मज़े से रखा । क्या चिकन बिरियानी खिलते थे, क्या सुरक्षा रखी थी मेरे लिए, बड़े बड़े नेता भी शरमा जाएँ मेरे आराम देख कर
चार साल मुझे बहुत अच्छे से रखा और बहुत खिलाया पिलाया जैसे ईद के दिनों में बकरे को खिलाया पिलाया जाता है। पर आज मुहर्रम के दिनों में ही मुझे फांसी भी दे डाली।
मेरे पीछे न जाने क्या होगा। मुझसे तो अफज़ल गुरु अच्छा है की इतने साल बीत गए हैं पर उसे तो फांसी नहीं दे पाते है भारत सरकार वाले ।
मैं तो अपने दुसरे आतंकवादी दोस्तों से यही कहूँगा की भाई लोगों पहले तो कोई दुश्मनी मूल मत लें और हो भी जीये तो भारत जैसे देश में ऐसी आतंकवादी कार्यवाही करें से दूर ही रहना
26 11 को जब वी टी स्टेशन पर लोगो को मारा था या फिर ताज में मज़े लिए थे तब नहीं सोचा था की इन भारतीय लोगों के हाथे चढ़ जाऊँगा। खैर सालों ने जितने दिन मुंबई जेल में रखा बड़े मज़े से रखा । क्या चिकन बिरियानी खिलते थे, क्या सुरक्षा रखी थी मेरे लिए, बड़े बड़े नेता भी शरमा जाएँ मेरे आराम देख कर
चार साल मुझे बहुत अच्छे से रखा और बहुत खिलाया पिलाया जैसे ईद के दिनों में बकरे को खिलाया पिलाया जाता है। पर आज मुहर्रम के दिनों में ही मुझे फांसी भी दे डाली।
मेरे पीछे न जाने क्या होगा। मुझसे तो अफज़ल गुरु अच्छा है की इतने साल बीत गए हैं पर उसे तो फांसी नहीं दे पाते है भारत सरकार वाले ।
मैं तो अपने दुसरे आतंकवादी दोस्तों से यही कहूँगा की भाई लोगों पहले तो कोई दुश्मनी मूल मत लें और हो भी जीये तो भारत जैसे देश में ऐसी आतंकवादी कार्यवाही करें से दूर ही रहना

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