बुधवार, 24 अक्टूबर 2012

आप इन दिनों कोई सा भी टीवी चैनल देखिये .कोई भी समाचार पत्र पढिये .दो व्यकित छये हुए हैं दो राजनीतिक दल छाये हुए हैं। हर कोई नितिन गडकरी और रोबट वाड्रा की बातें कर रहा है।

पहले अरविन्द केजरीवाल ने रोबट वाड्रा और डी एल एफ की कहानी को उछाला  फिर कुछ दिनों बाद नितिन गडकरी की पूर्ति समूह की कहानी सामने आयी। दोनों काफी अलग सी दिखती कहानियां हैं पर फिर भी दोनों में काफी साम्यता  है। 

किसी ने सच ही कहा है की आज के कलयुग में कोई बिना स्वार्थ के अपने सगे भाई को भी पैसे नहीं देता हैं फिर क्या कारन हैं कि  आइ आर बी और डी एल एफ ने क्रमशा नितिन गडकरी और रोबर्ट वाड्रा के लिय दसियों करोडो के बिना ब्याज के कर्ज भी दिए और कम्पनी में निवेश भी किया।

यह माता सयोंग नहीं हो सकता है कि पूर्ति समूह में निवेश करने वाली वाही कंपनी है जिसे नितिन गडकरी के मंत्रित्व कल में बड़े ठेके मिले थे . या फिर रोबट वाड्रा जिन्होंने बहुत सारी ज़मीन डी एल एफ को दिल्ली और हरियाणा में नियमित करके दिलवाई 
मैं न किसी पर आरोप लग्न चाहता हूँ और न ही किसी व्यक्ति विशेष या दल विशेष का समर्थन या विरोध करना चाहता हूं . एक तरफ नितिन गडकरी जी सिर्फ एक ही जवाब देते हैं की वो जांच करने के लिए तैयार हैं। दूसरी और कोंग्रेस वाले रोबट वाड्रा के केस में जांच की ज़रूरत ही नहीं समझते हैं। मेरे विचार में दोनों ही गलत हैं। नितिन जी जिस दल का नेत्रत्व करते हैं वो बड़ा पाक साफ़ होने का दावा करता है फिर  उसकी अध्यक्षता करने का उन्हें अधिकार ही नहीं बनता जब तक वो अपने आपको इन आरोपों से मुक्त नहीं कर लेते।
यदि आपने उनके टीवी साक्षात्कार को देखा हो तो वे किसी भी प्रश्न का ठेल जवाब नहीं दे पाए और सिर्फ यही कहते रहे कि  वो जांच के लिए तैयार हैं।

खैर जांच होगी या नहीं या फिर जांच शुरू होगी तो उसका क्या हश्र होगा कोई नहीं जनता क्योंकि आज तक किसी जांच का कोई नतीजा निकला नहीं है। कम से कम इन नेताओं के लिए तो जांच होना कोई बड़ा महत्त्व नहीं रखता है। महज टाइम पास है 

साथ ही एक प्रश्न ये भी उठता है कि  ये बड़े बड़े घराने बड़े बनने के लिए किस तरह के जुगाड़ करते हैं और बड़े बनने   के लिए सब तरह के भ्रष्टाचार करने को तैयार रहते है .

हम सबको तो अपने घर भरने से मतलब है  भाड में जाये आम आदमी।

वास्तव में हमारा लोकतंत्र गज़ब है।